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मैं ठहर सा गया था तुम जो मिले

 मैं ठहर सा गया था तुम जो मिले तो चलने का मौका मिला मंजिल छूट जाती तुम अगर साथ नहीं देते जिसकी चाहत थी हर चीज वह अपनी है खुशियों में चल रही हैं ज़िंदगी हर ख़्वाब पूरे हो गए